लता मंगेशकर की आवाज पर पूरी दुनिया कायल थी, ओर उन्हे सताया करता था ये डर…

लता मंगेशकर का निधन 6 फरवरी को मुंबई में हुआ। उन्हें 8 जनवरी को कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। अस्पताल में लगभग महीनेभर का समय बिताने के बाद लता दीदी ने दुनिया से विदा ली। उनके अंतिम समय में उनके साथ उनका परिवार था। 6 फरवरी को हुए लता मंगेशकर के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेता-राजनेता, बॉलीवुड सेलेब्स, पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर संग अन्य पहुंचे थे। सभी ने लता दीदी को अंतिम अलविदा कहा और उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।

उन्होंने कहा था की जब मैं जवान थी और स्ट्रगल कर रही थी, तब भी मैं एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागने में खुश थी। मैं दूसरे स्ट्रगल करने वालों किशोर दा और मुकेश भैया से टकराया करती थी। मेरे पर्स में पैसे नहीं होते थे। लेकिन मेरे दिल में उम्मीद जरूर होती थी। वह समय बहुत मजेदार था, भले ही तब मुझे पूरे दिन भूखा रहना पड़ता हो। और इस बात का विश्वास था कि भले ही भविष्य कितना भी मुश्किल लग रहा हो, एक बेहतर कल की उम्मीद हमेशा होती है।

उन्होंने कहा था की मुझे ऐसा लगता है की आज के समय में यंग लोगों का फोकस बहुत सीमित है। वह अतीत में बिल्कुल नहीं रहते हैं। यह तत्काल संतुष्टि का युग है। यहां हर कोई हर पल को जीना चाहता है। मुझे नहीं लगता कि भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए मेरी लेगेसी उतना मायने रखेगी जितनी आप जैसे लोगों के लिए रखती है।

लता मंगेशकर को हमेशा कहा जाता था कि उनकी लेगेसी कभी खत्म नहीं होगी। उनके गाने आज से 100 साल बाद भी सुने जाएंगे। एक इंटरव्यू में लता मंगेशकर से पूछा गया था कि वह 92 साल की हो गई हैं, तो क्या वह अपना यंग होना मिस करती हैं? इसपर लता मंगेशकर ने कहा था की मैं सच बताऊं? मुझे अपनी उम्र महसूस ही नहीं होती। मैं आज भी यंग महसूस करती हूं। मैं अपनी परेशानियों की वजह से कभी टूटी नहीं। सभी की जिंदगी में उनके हिस्से की दिक्कतें होती हैं।

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